शनिवार, 3 सितंबर 2011

चेहरे पर दाग और दर्पण पर गुस्सा

हमारे 'माननीय' सांसद हाथ धोकर टीम अन्ना के पीछे पड़ गए हैं. उनकी गलती बस इतनी है कि उन्होंने इन महोदयों को आइना दिखा दिया है. अब ये सज्जन टीम अन्ना को सबक सिखाना चाहते हैं. संभव है कि वे उनको जेल भेज दें. आखिर साडी ताकत उनके ही हाथ में है. लेकिन उस जनता को कैसे रोकेंगे जो उन्हें दिन रात गालियाँ देती है ? क्या यह अच्छा न होता कि वे दर्पण को  कोसने के बजाय अपने दागों को दूर करते?

कुछ पंक्तियाँ पेश हैं

                          मैंने समझा था कि मेरे चेहरे पे नूर होगा
                          किसे पता था कि आईने से ये  भरम दूर होगा
                          दिखा दिए हैं मेरे चेहरे के दाग इसने 
                          ये कमबख्त आइना कब चूर चूर होगा

रविवार, 14 अगस्त 2011

चुप रहो, आज १५ अगस्त है!

देश की जनता समस्याओं से बुरी तरह त्रस्त है,
चुप रहो, आज १५ अगस्त है!

सबको  मिली हुई है पूरी आजादी
अधिकारियों को मनमानी की
नेताओं को खींचातानी की
व्यापारियों को खुलकर लूटने की
पुलिस को जमकर पीटने की

जनता तो लुटने-पिटने की अभ्यस्त है,
                           चुप रहो, आज १५ अगस्त है!

हर तरफ फैला हुआ है भारी भ्रष्टाचार 
सामने खड़े हैं समस्याओं के पहाड़
बजबजाती नालियां, कूड़े के अम्बार
सड़कों पर सूअरों का उन्मुक्त विचरण 
दुर्लभ हैं बिजली और पानी के दर्शन 

नगर निगम अतिक्रमणों के नाम पर वसूली में मस्त है
                          चुप रहो, आज १५ अगस्त है!

बेरोजगारों की बढती हुई फ़ौज 
चारों तरफ है माफिया गिरोहों का राज
प्यासी है धरती, खाली हैं किसानों के पेट
रोज बढ़ते जा रहे हैं जरूरी चीजों के रेट 

सरकार वोटों की फसल उगाने में व्यस्त है
                         चुप रहो, आज १५ अगस्त है!

सोमवार, 8 अगस्त 2011

अथ

ये मेरा पहला ब्लौग है इसमें मैं आपसे कुछ दिल की बातें करूंगा. आप भी अपनी भावनाओं से मुझको  जरूर अवगत कराएं.